Rishabh tomar

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उदास दिसंबर हूँ

जिसमें टूट नही पाया धनुष वो स्वयंवर हूँ
मैं होकर भी, न होने वाला शून्य अम्बर हूँ

तुम हो जनवरी सा खुशनुमा नया महीना
मैं शर्दीला दर्द में गुजरा उदास दिसंबर हूँ

शायद जान लिया है खमोशी में तूफान है
तभी वो लड़की बोलती है मुझे समंदर हूँ

दुआ है, हरियालियाँ अता करे मोला उसे
मैं बहुत खुश हूँ रेत सा खमोश हूँ बंजर हू

          ज्यादा कुछ नही बस पैरों पर खड़ा हुआ
सबकी आंखों में चुभा तो लगा खंजर हूँ

मशुहरा है इश्क़ मत करना भूलकर भी
इससे बन गया मौत के बाद का मंजर हूँ

हार सकता है लड़ना नही छोड़ेगा ऋषभ
जिंदगी को जीने में मैं दिल से सिकंदर हूँ

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7 Comments

बहुत ही सुंदर सृजन और अभिव्यक्ति एकदम उत्कृष्ठ

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Sangeeta( chahat) kushwah

07-Dec-2022 01:45 PM

बहुत खूब अनुज

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Rishabh tomar

08-Dec-2022 07:49 PM

धन्यवाद दीदी

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Gunjan Kamal

05-Dec-2022 04:56 PM

बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति 🙏🏻🙏🏻

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Rishabh tomar

06-Dec-2022 06:42 AM

बहुत बहुत आभार आदरणीय🙏

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